School Holiday News : उत्तराखंड राज्य के कई जिलों में मौसम ने फिर से करवट ले ली है। भारतीय मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनी के अनुसार सोमवार को देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल, चंपावत और उधमसिंह नगर जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका है। इस चेतावनी के चलते इन जिलों में ऑरेंज अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
ऑरेंज अलर्ट का सीधा मतलब है कि भारी वर्षा के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो सकता है, जिससे स्कूल, यातायात, बिजली आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवाएं और सार्वजनिक परिवहन आदि क्षेत्रों में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए कुछ जिलों के स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों में सोमवार को अवकाश घोषित कर दिया है।
देहरादून में सभी स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र बंद
देहरादून जिले के जिलाधिकारी श्री सविन बंसल ने भारतीय मौसम विभाग द्वारा जारी भारी वर्षा और तूफानी हवाओं की चेतावनी को गंभीरता से लेते हुए आदेश जारी किया है कि जिले के सभी प्राइवेट और सरकारी स्कूलों को सोमवार के दिन बंद रखा जाएगा। साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों में भी छुट्टी रहेगी। यह निर्णय छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए लिया गया है।
ऑरेंज अलर्ट जारी: क्या है इसका मतलब?
ऑरेंज अलर्ट का तात्पर्य होता है – “Be Prepared”, यानी कि तैयार रहें। इस स्तर की चेतावनी तब जारी की जाती है जब मौसम अचानक से बिगड़ सकता है और जन-धन की हानि की आशंका हो। उत्तराखंड के जिन जिलों में यह अलर्ट जारी किया गया है, वहां पर भारी बारिश के साथ बिजली गिरने, तेज हवाएं चलने और भूस्खलन जैसी घटनाओं की संभावना जताई गई है।
किन-किन जिलों में है भारी बारिश की चेतावनी?
- देहरादून
- टिहरी गढ़वाल
- पौड़ी गढ़वाल
- नैनीताल
- चंपावत
- उधमसिंह नगर
इन सभी जिलों में आने-जाने वाले यात्रियों और स्थानीय नागरिकों को सतर्क रहने के लिए कहा गया है।
आकाशीय बिजली और तेज हवाओं का भी खतरा
मौसम विभाग के अनुसार इन जिलों में कुछ स्थानों पर आकाशीय बिजली गिर सकती है। इसके अलावा तेज हवाओं के कारण पेड़, बिजली के खंभे और कमजोर निर्माण ढहने की आशंका भी जताई गई है। प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि वे बिना जरूरत घर से बाहर न निकलें और अगर निकलना आवश्यक हो तो पूरी सुरक्षा के साथ निकलें।
राज्य आपदा प्रबंधन की तैयारियां
राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जिलों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने इलाकों में प्रशासनिक टीम को अलर्ट रखें। विशेष तौर पर उन स्थानों पर नजर रखने को कहा गया है जो भू-स्खलन, जलभराव, या बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील हैं।
प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं ताकि किसी आपात स्थिति में आमजन तुरंत संपर्क कर सकें।
यातायात व्यवस्था पर असर
भारी बारिश के कारण सड़कों पर जलभराव की समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसके साथ ही ट्रैफिक जाम और कुछ मार्गों के बंद होने की आशंका भी जताई गई है। प्रशासन ने लोगों को सलाह दी है कि वे यात्रा करने से पहले मौसम की ताजा जानकारी ज़रूर ले लें।
अभिभावकों में चिंता का माहौल
स्कूल बंद होने और मौसम की गंभीर चेतावनियों के चलते बच्चों के माता-पिता चिंतित हैं। हालांकि प्रशासन द्वारा उठाए गए एहतियाती कदम सराहनीय हैं और इससे बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है।
विशेषज्ञों की राय
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय उत्तराखंड में मानसून काफी सक्रिय है और पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन तथा बादल फटने की घटनाएं भी हो सकती हैं। ऐसे में बेहद जरूरी है कि आमजन प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें और अलर्ट रहें।
क्या करें और क्या न करें?
क्या करें:
- मौसम विभाग के अपडेट पर नज़र रखें
- घर से बाहर निकलते समय छाता या रेनकोट साथ रखें
- मोबाइल में मौसम अलर्ट ऑन रखें
- बच्चों और बुजुर्गों को जलभराव वाले क्षेत्रों में न भेजें
- आवश्यक दवाइयां और जरूरी सामान पहले से रखें
क्या न करें:
- भारी बारिश के दौरान पुलों और नालों के पास जाने से बचें
- बिजली गिरने के समय मोबाइल या इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का उपयोग न करें
- अफवाहों पर ध्यान न दें
आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर
उत्तराखंड आपदा प्रबंधन विभाग ने निम्नलिखित हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं:
- आपदा कंट्रोल रूम: 1070
- देहरादून जिला हेल्पलाइन: 0135-2726066
- पुलिस कंट्रोल रूम: 112
- स्वास्थ्य आपातकाल: 102 / 108
निष्कर्ष
उत्तराखंड में भारी बारिश ने फिर से जनजीवन को प्रभावित करने की स्थिति में पहुंचा दिया है। हालांकि, समय रहते प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों से संभावित जोखिम को काफी हद तक टाला जा सकता है।
स्कूलों में अवकाश और अलर्ट जारी करना एक सतर्क और संवेदनशील निर्णय है, जो विद्यार्थियों, अभिभावकों और अध्यापकों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है।
सावधानी ही सुरक्षा है, इसलिए सभी नागरिकों से अनुरोध है कि वे स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें और सुरक्षित रहें।