Agriculture Business Yojana : राजस्थान सरकार ने एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी पहल के तहत एग्रीकल्चर बिजनेस स्कीम 2025 की शुरुआत की है, जिसका मुख्य उद्देश्य पारंपरिक खेती को पुनर्जीवित करना और छोटे व सीमांत किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाना है। यह योजना विशेष रूप से उन किसानों के लिए लाई गई है जो आज भी आधुनिक मशीनों के स्थान पर बैलों की मदद से खेती करते हैं।
परंपरा और पर्यावरण की रक्षा का संकल्प
आज के युग में जब खेती का अधिकांश कार्य आधुनिक यंत्रों की सहायता से किया जा रहा है, ऐसे में पारंपरिक खेती को बढ़ावा देना न सिर्फ एक अनोखी पहल है, बल्कि यह पर्यावरण की रक्षा और जैविक खेती को भी मजबूती प्रदान करता है। बैलों से की गई खेती में जीवाश्म ईंधन का प्रयोग नहीं होता, जिससे प्रदूषण भी नहीं होता और मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है।
हर साल ₹30,000 की वित्तीय सहायता सीधे बैंक खाते में
राजस्थान सरकार ने इस योजना के अंतर्गत यह घोषणा की है कि पारंपरिक तरीके से खेती करने वाले किसानों को हर वर्ष ₹30,000 की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। यह राशि सीधे किसानों के DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी ताकि वे इसे खाद, बीज, जैविक दवाइयों और परंपरागत कृषि उपकरणों की खरीद में उपयोग कर सकें।
योजना से किन किसानों को मिलेगा लाभ?
यह योजना उन किसानों के लिए लागू है:
- जो पारंपरिक कृषि पद्धति अपनाते हैं यानी बैलों की सहायता से खेत की जुताई करते हैं।
- जिनके पास स्वस्थ बैलों की जोड़ी है जिनकी उम्र कम से कम 15 महीने और अधिकतम 12 साल के बीच हो।
- जिनके पास राजस्थान की स्थायी निवास प्रमाणपत्र है।
- जिनके पास स्वयं की कृषि भूमि हो या अधिकारिक पट्टा हो।
सीमांत और छोटे किसानों को मिलेगा संबल
राजस्थान में ऐसे लाखों किसान हैं जिनके पास सीमित कृषि भूमि है और वे आधुनिक ट्रैक्टर या अन्य महंगे कृषि उपकरण खरीदने में सक्षम नहीं हैं। यह योजना ऐसे किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। इस सहायता से वे कृषि लागत को कम कर सकेंगे और अपनी आमदनी में वृद्धि कर सकेंगे।
बीमा और स्वास्थ्य प्रमाण पत्र अनिवार्य
योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को बैलों का बीमा कराना अनिवार्य होगा। इससे किसी भी अप्रत्याशित स्थिति में मुआवजा प्राप्त करना संभव होगा। इसके अलावा, बैलों का स्वास्थ्य प्रमाण पत्र देना भी जरूरी होगा जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे खेती के कार्य के लिए सक्षम हैं।
आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन
राजस्थान सरकार ने इस योजना के तहत आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बना दिया है ताकि पारदर्शिता बनी रहे और किसानों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। किसान राजस्थान कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या किसान साथी पोर्टल पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।
ऑनलाइन आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज़
- किसान का नाम, पता और मोबाइल नंबर
- आधार कार्ड की कॉपी
- बैंक खाता विवरण (IFSC कोड सहित)
- बैलों की जानकारी (उम्र, स्वास्थ्य प्रमाण पत्र)
- भूमि के स्वामित्व का प्रमाण या अधिकृत पट्टा
- बैल बीमा दस्तावेज
आवेदन की प्रक्रिया
- सबसे पहले किसान को राजस्थान कृषि विभाग की वेबसाइट या किसान साथी पोर्टल पर जाना होगा।
- “एग्रीकल्चर बिजनेस स्कीम” सेक्शन में जाकर आवेदन फॉर्म भरना होगा।
- फॉर्म भरते समय सभी आवश्यक दस्तावेजों की स्कैन कॉपी अपलोड करनी होगी।
- सबमिट करने के बाद एक आवेदन संख्या जनरेट होगी जिससे किसान आगे की स्थिति को ट्रैक कर सकता है।
दस्तावेजों की जांच के बाद ही मिलेगा लाभ
कृषि विभाग द्वारा सभी आवेदनों और दस्तावेजों की जांच की जाएगी। यदि सभी शर्तें पूर्ण होती हैं तो आवेदन को मंजूरी दे दी जाती है। इसके पश्चात 20 से 40 दिनों के भीतर ₹30,000 की सहायता राशि लाभार्थी के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है।
पारंपरिक खेती को मिलेगा नया जीवन
इस योजना के माध्यम से राजस्थान सरकार पारंपरिक खेती को एक बार फिर सम्मान और पहचान दिलाने का प्रयास कर रही है। बैलों से खेती करने की पुरानी पद्धति को सिर्फ आर्थिक रूप से नहीं बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय रूप से भी एक नई दिशा देने की कोशिश की गई है।
युवाओं को जोड़ने की कोशिश
सरकार की योजना है कि इस स्कीम को ज्यादा से ज्यादा युवाओं तक पहुंचाया जाए ताकि वे पारंपरिक खेती में फिर से रुचि लें और कृषि को एक फायदे का व्यवसाय समझें। इसके लिए ग्राम पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
पर्यावरणीय लाभ
- बैलों से जुताई करने पर मिट्टी की ऊपरी परत संरक्षित रहती है।
- ईंधन आधारित यंत्रों की तुलना में यह प्रक्रिया ज्यादा क्लाइमेट फ्रेंडली होती है।
- जैविक खेती के लिए पारंपरिक पद्धतियां अधिक उपयोगी हैं।
निष्कर्ष
एग्रीकल्चर बिजनेस स्कीम 2025 न सिर्फ एक कृषि योजना है बल्कि यह सामाजिक, पर्यावरणीय और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी एक अनूठा प्रयास है। राजस्थान सरकार का यह कदम उन लाखों किसानों के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा जो संसाधनों की कमी के बावजूद खेती से जुड़े हैं।