OPS Scheme 2025 : भारत में सरकारी सेवा में कार्यरत लोगों के लिए सेवानिवृत्ति के बाद की आर्थिक स्थिरता सदैव चिंता का विषय रही है। जहां पहले उन्हें पुरानी पेंशन योजना (OPS) के अंतर्गत आजीवन निश्चित पेंशन मिलती थी, वहीं 2004 के बाद केंद्र सरकार ने नई पेंशन योजना (NPS) लागू कर दी थी, जिसमें पेंशन पूरी तरह बाजार आधारित हो गई।
अब वर्ष 2025 में सरकार ने एक नई पेंशन नीति की नींव रखी है – यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS)। यह योजना OPS और NPS के गुणों को मिलाकर बनाई गई है, पर इसमें विरोध की लहर भी साथ ही चल रही है।
क्या है यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS)?
UPS (Unified Pension Scheme) एक ऐसी पेंशन प्रणाली है जिसे सरकार ने इस प्रकार डिज़ाइन किया है कि यह पुरानी और नई पेंशन प्रणालियों के बीच संतुलन बना सके।
इस योजना के अंतर्गत कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति पर पिछले 12 महीनों के औसत वेतन का 50% पेंशन के रूप में दिया जाएगा। इस राशि पर बाजार की अस्थिरता का सीमित प्रभाव पड़ेगा, जिससे कर्मचारी भविष्य के लिए मानसिक रूप से अधिक सुरक्षित महसूस करेंगे।
UPS की विशेषताएँ – एक नजर में:
▪️ OPS की तरह पेंशन गारंटी, लेकिन सीमित रूप में।
▪️ NPS की तरह कर्मचारी और सरकार दोनों का योगदान।
▪️ OPS के मुकाबले कम बोझ सरकारी खजाने पर।
▪️ NPS के मुकाबले ज्यादा स्थिरता और सुरक्षा।
OPS vs NPS vs UPS – तुलनात्मक विश्लेषण:
| योजना | योगदान | पेंशन की गारंटी | बाजार का असर | महंगाई भत्ता |
|---|---|---|---|---|
| OPS | नहीं | पूरी तरह तय | नहीं | शामिल था |
| NPS | दोनों | कोई गारंटी नहीं | पूर्ण प्रभाव | शामिल नहीं |
| UPS | दोनों | 50% तय पेंशन | सीमित प्रभाव | अस्पष्ट स्थिति |
UPS से क्या मिल सकती है राहत?
NPS में जहां कोई निश्चित पेंशन राशि की गारंटी नहीं थी, UPS में कर्मचारियों को अब कम-से-कम यह आश्वासन है कि उन्हें सेवा के बाद एक निर्धारित राशि मिलेगी। यह निश्चितता भविष्य की योजना में सहायता करती है।
फिर विरोध क्यों?
हालांकि UPS की घोषणा सरकार ने बड़े दावों के साथ की है, लेकिन कर्मचारी और शिक्षक संगठन इसे OPS के समकक्ष नहीं मान रहे हैं।
उनका तर्क है कि:
▪️ UPS में महंगाई भत्ते की कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है।
▪️ यह योजना सभी कर्मचारियों के लिए समान रूप से लाभकारी नहीं है।
▪️ OPS ही एकमात्र ऐसा मॉडल था जो आजीवन सुरक्षा देता था।
देशभर में UPS का विरोध – कुछ घटनाएं:
प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) – शिक्षकों ने सांसद को पत्र लिखकर OPS की बहाली की मांग की।
दरभंगा (बिहार) – कर्मचारियों ने ‘काला दिवस’ मनाया, UPS के विरोध में काले बैज पहनकर प्रदर्शन किया।
राजनीतिक हस्तक्षेप और समर्थन
कुछ सांसद और राजनीतिक दलों ने कर्मचारियों के पक्ष में आवाज बुलंद की है। वे प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को पत्र लिखकर 80 लाख से अधिक NPS कर्मचारियों को OPS जैसी गारंटी देने की मांग कर रहे हैं।
कर्मचारी संगठनों की मुख्य आपत्तियाँ
▪️ तीन-चार दशकों की सेवा के बाद एक व्यक्ति को सम्मानजनक और सुनिश्चित पेंशन मिलनी ही चाहिए।
▪️ बाजार आधारित योजनाएं बुजुर्गों के लिए अस्थिरता और अनिश्चितता पैदा करती हैं।
▪️ UPS सिर्फ दिखावटी सुधार है, वास्तविक समाधान नहीं।
सरकार की दलील
सरकार का कहना है कि UPS एक स्थिर, व्यावहारिक और संतुलित व्यवस्था है।
▪️ इससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
▪️ कर्मचारियों को भी एक गैर-बाजार आधारित, तय पेंशन मिलेगी।
▪️ यह योजना भविष्य में एक आदर्श मॉडल बन सकती है।
आगे का रास्ता
यदि विरोध और तेज हुआ, तो संभव है कि सरकार को UPS में संशोधन या बदलाव करने पड़ें। या फिर किसी तरह के संशोधित OPS मॉडल पर विचार करना पड़े।
फिलहाल UPS एक प्रयोगात्मक व्यवस्था है, जिसे समय के साथ परखा जाएगा।
निष्कर्ष
यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS), एक नया प्रयास है जो पुरानी सुरक्षा और नई अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता है। हालांकि यह पहल सराहनीय है, फिर भी कर्मचारियों का मन अब भी OPS की ओर झुका हुआ है।
सरकार को चाहिए कि वह कर्मचारियों की आवाज को गंभीरता से सुने और उनके सुरक्षित भविष्य की गारंटी सुनिश्चित करे।